आज और कल के बीच कहीं Happy New Year

तुम कहते हो की गुज़र गया
पर मैंने थोड़ा बाँध लिया
एक पोटली में
गुड़ और रोटी के बीच कहीं
मैंने कुछ सपने बोये थे
इक ऐसी ही तारीख गयी थी
तब भी गुज़रा था ऐसा ही कुछ
तब भी कुछ और समेटा था
अब देखूंगा कल सुब्हा फिर
क्या कोई  फूल खिला है वहां
आज नहीं तो कल होगा

या आज और कल के बीच कहीं

हर साल मुबारक हो तुमको
इस साल और उस के बीच  कहीं |

नव वर्ष की शुभकामनाएं.

My warm wishes for a very happy new year and a and prosperous 2015

Create your own website, free on WordPress.com.Create your own website.
Start free