Akeli Tasveeron Mein

अकेली तस्वीरों में अक्सर मैं
खुद को ढूँढा करता हूँ
तुम्हारी आँखों से,
बातों में…
खुद को ढूँढा करता हूँ

जो हँसती हो तो लगता है
कि मैंने ही कोई चुटकुला सुनाया होगा
या तुम्हारी ज़ुल्फ़ों के बारे में
दो शेर पढ़ दिए होंगे

अपने क्लोज़ अप को
ज़रा क्लोज़ होकर देखता हूँ
क्या पता
आँखों में तुम दिख जाओ

कभी तुम सोच में होती हो तो
डर जाता हूँ
कुछ उल्टा-पुल्टा कह तो नहीं दिया था मैंने

जज़्बातों को
अक्सर फोटो की परतों पर
बूँद-बूँद गिरा कर
और यादों के अँधेरों में
अपनी साथ गुज़ारी उम्रों की
बाती जला कर

अकेली तस्वीरों में
अक्सर
तुम्हारे साथ
खुद को
ढूँढा करता हूँ
तुम्हारे साथ बीती
खामोशियों में…
साँसों में…

खुद को ढूँढा करता हूँ

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